नारद बजलाह

कलयूगक स्वर्ग साइवर कैफे मे उपस्थित देवता लोकनिक अपन अपन क्यूबिकल मे बैसि अपन क्म्यूटर सँ चैट करैत छलाहचारु तरफ बुझू जे अफस्यानी व्य्स्तता. किछु देवता याहू मैसेन्जर पर बैसल छलाह ते किछु ओरकुट पर. मुदा  इन्द्र भगवान अपन गूगल टाक पर एखने लागिन केने छलाह कि गूगल टाक जीन्न तूरँत सूचना देल्कन्हिनारद जी ओनलाईन”. जाबय धरि मे किछु सोचतथि ताबय मे नारद जी मैसेज एलन्हि, “नारयण! नारायणभगवन! हम छी नारद मुनी, पृथ्वी लोक सँ सीधे आनलाइन, अपने सँ हमरा तुरन्त गप्प करबाक अछिकी अपने किनको आओर सँ बात करैत छा वा हम अपन बात बताबी…  नारायण! नारायण!”

इन्द्र भगवान पुछि देलकन्हि, “जी नारद जी!  अपने एखन पृथ्वी लोक मे छी बताबु जे मैथिली ब्लोग मे कोन प्रगति भेल अछि?

नारद जी कहय लगलाह, “हे राजन द्वालख नव निर्माण समिति बहुत दिन सँ चलि रहल अछि. लगभग दो साल होमय जा रहल अछि, मुदा एखन धरि ओतेक कोनो विशेष लोकप्रियता नहि भेटल अछि. पृथ्वी पर रहय वाला मिथिला वासी एखनो धरि मैथिली ब्लोगिंगक प्रति अभिरुचि नहि देखा रहल छथिओना हाल मे एकर लोकप्रियता कनिएक बढल अछि. आब लगभग 100 गोटा मैथिल प्रति दिन एहि ब्लोगद्वालख नव निर्माण समितिभ्रमण करैत छथि. मुदा मैथिली मे लिखय वाला एखनो धरि एक्के दर्जन लोक छथि.

इन्द्र जी पुछल्थिन्ह, ” चलु से ते ठीक जे सौ गोटा ते मैथिली ब्लोग भ्रमण करैत छथि , नारद जी! मुदा तैयो कहल जाए जे पृथ्वी लोक मे मैथिली ब्लोग की हलचल रहल अछि”.

नारद उत्तर देलाह, “हलचल ते बहुते छैक मुदा पाठके कम छथिएखन धरि मे  द्वालख नव निर्माण समिति मे संतोष कुमार संतोषी   बरकी भौजी अत्ति उत्तम अछि खच्चरैहि……बाप रे……. नामक उपन्यास तेसर अंक लिखल जा चुकल अछिओतय बहुत जल्दीये खच्चरैहि सब के भविष्य तय होमय वाला अछि.”

नारद जी अपन बात केँ आगु बढबैत कहलाह, “नारायण! नारायण! मैथिली ब्लोग मे किछ नव मुदा ठोस खिलाड़ी प्रवेश कय चुकल छथि. जेना श्री मनीष कुमार झा जे  मिथिला हुँकार, श्रिँगार सँ सिनेह धरि, आजुक कमौआ पूत,  नामक ब्लोग केँ आयल छथि. सही अर्थ मे देखू ते ब्लोग सही प्रयोग केवल संतोष कुमार संतोषी करैत छथिआई काल्हि मिथिला मे जे रहल अछि ओकर वर्णन अपन ब्लोग द्वालख नव निर्माण समिति मे दिन प्रति दिन करैत रहैत छथि. सम्प्रति अपन ब्लोग मे मैथिली केँ अष्टम सूचि मे शामिल केला बाद इग्नू पाठ्यक्रम मे मैथिली शामिल करबाक व्याख्यान केने छथि. हिनक ब्लोग मे निम्न लेख बहुत ग्यानोत्तेजक अछि- ( उन्नैति…. कीखच्चरैहि () बरकी भौजी -चाहक कप हाथ में  ()  खच्चरैहि……बाप रे……. . संतोष कुमार संतोषी मैथिली भाषा केँ इन्टरनेट पर आनबा मे अभूतपूर्व योगदान छन्हि.

इन्द्र भगवान बजलाह, “सत्ते संतोष कुमार संतोषी जी धन्यवादक पात्र छथि. नारद जी सुनू साइवर कैफे सँ सीधे संतोष कुमार संतोषी जी ब्लोग पर जाउ हमरा दिसि सँ धन्यवाद लिखि दियौकनारद जी अपने रुकु नहि कहु जे मैथिली मे अपने कोन कोन ब्लोगक विजीट कयलहुँ”.

नारद मुनि बजलाह, ” नारयण! नारायण! मैथिली मे लगभग एक दर्जन ब्लोग आओर ब्लोग अछि. .