महाभुकम्प....... पिरीत.

महाभुकम्प....... पिरीत.

माय गै..... सरकार के जाड़ नै होईछै..!!.... (डेकसी )

मंगनू :- माई गै बड जाड़ होईये....!

माय.: - आऊ बाबू ...घुसैक आऊ एम्हर..

(फाटल पुरान सन तौनी ,अपना देह सँ उतारि अपन आठ बरखक बेटा मँगनू के ओढ़ा देलक धनमाया दाई )

बज्जर खसौ ऐहि जार के... दिनेदिन बैढ़िते जाई छै..

(माईटिक बनावल चुल्ही में जारैन द क सलाई खररय लागल धनमाया... ठिठूरल हाथे.. सिमसल सलाई पर बेर बेर काठी रगरलाक बाद कहुना आईग धैरि पजैर गेल चुल्ही में. )

आऊ बाबू.. और घुसैक आऊ एम्हर... आईग तापू...!

मंगनू; -माई गै.. पहिने सनक निकहा घर में कहिया स रहबै अपना सब...??

(हठात बेटाक ऐहि प्रश्न पर अलमला गेली धनमाया..)

कि जानै गेलियै बाबू..! सरकार त बेर बेर कहै छै,भुकम्प में जकरा सबहक घर खैस परलै ,सबके नबका घर बना के देल जेतै ..
कम्बल ,सिरक,चौर ,गहूम सबटा सुबिधा भेटतै भुकम्प पिरीत सबके..."

मंगनू:-माय गै...बाबू कहिया गाम ऐतै...??

(सन्न रैहि गेल धनमाया ..एक्कहि टा झूठ कतेक बेरि बाजत..कंठ जेना अवरूद्ध भ गेलै..मोन के सम्हारैत,पाछु घुमि हाथ स नोर पोछैत एकबेर फेर सँ झुठ बाजि गेल धनमाया..)

जल्दिये ऐथुन तोहर बाबूजी. ..!

मंगनू: -(मायक आँईख में नोर देखि )की भेलौ माय... ??

माय: -नै किछु बाबू... कहाँ किछु...ओ ,आँईख में धूँआ लागि गेल... !!

मंगनु: -माय गै.. हम फेर कहिया स अपन स्कूल जेबै... ??

माय: -ओ स्कूल बड दूर भ जाई छलय अहाँके ,तैं अहाँके बाबूजी कहलक, आब बौआ गामें के सरकारी स्कूल में पढ़तै.. !
आ सरकारो कहै छै जे सरकारी स्कूल के पढ़ाई लिखाई आब नीक हेतै.. बच्चा सबके लत्ता कपरा, जुत्ता मोजा, साईकिल खेनाई पीनाई सबटा स्कूले देतै... आ फीसो नै लगतै...

(भीतर उफनैत समुन्दर के शांत करबाक नीके प्रयास क रहल छल धनमाया )

मंगनू: -माय गै... भुख लागल.. खेनाई नै बनेबिही आई.. ??

माय:-हँ बाबू... हईया अही चुल्ही पर भात चढ़ा दै छियै... कने सोझ भ के बैस न बौआ, हईया हम चाऊर धोने आबै छी..

(बाहर निकैल के चाऊर धोई के चुल्ही पर चढाबैत चढाबैत जार सँ काँपय लागली धनमाया.. )

(फटलाहा सुजनी के टाटक दोघ में कोंचैत ...)

जरलाहा ऐहि दोघ स कतेक हवा अबै छै.. भगवानो के शक्ति नै रहलै... दुखे पर दुख...

(बर्दाश्तक बान्ह टुटि गेल.. गंगा यमुना बहय लागल धनमाया के आँईख सँ.. )

मँगनू: -माय गै.. तोरो जार होई छौ न... ??

माय: -हँ बाबू.. जार त सबके होईछै..

(चाऊर सेहो सदहै पर आबि गेलै,आगुक दिन कोना कटतै से सोचैत पिछुलका दिन मोन पैरि गेल धनमाया दाई के.. )
(घरबला काठमाण्डू में दैनिक मजदूरी क के ऐतेक कमा लैत छलै जाहि सँ नीक जँका जीवन यापन क रहल छल धनमाया.. एकटा मात्र बेटा के गाम स बाहर प्राईभेट स्कूल में पढा रहल छल.. चारि पाँच साल में किछु पैसा जोगेलक त घर सेहो बैनि गेलै गाम में... पछिला बेर काठमाण्डू जाईत काल मंगनू के बाबू कैह गेल रहै, जे आब आएब त घर में टीबी लगाएब.. मँगनू त स्कूल स गाम धैरि सब दोस्त के कैह देने छै ,जे हमर बाबू टीबी अनतै ऐहि बेर ..
मुदा,, 
दैबक लाठी... महाभुकम्प में गामक घर त खैसिये परलै... 
काठमांडू में जे कोनो तिमंजिला मकान खसलै ....ओहि तर में पैरि मंगनू के बाबूजीक अंत भ गेलै...घरबला के 
मरलो मुँह कहाँ देखि पेलक धनमाया.. 
ओ त संग में काज करै बला सब समाद कहलकै तखन बुझि सकल धनमाया.. 
धिरे धिरे चारू तरफ सँ दुखक बिहैर घेर लेलकै धनमाया के... आठ बरखक अबोध नेना के एखनहु धैरि नै कैहि सकल जे, तोहर बाप मोईर गेलौ आ तू बपटुगर भ गेलेँ... 
कोना कहत ओहि नेना के जे रोज अपन बाबू के गाम ऐबाक बाट जोहि रहल..
साल भैरि त बिति गेल ओ दानव दिन... 
बेरि बेरि सरकारक आश्वासन भेटि रहलै कतेको धनमाया के.. 
मात्र आश्वासन.

पुरना मुदा मोटगर सनक एकटा कम्बल धैरि बाँचल छै घर में, जाहि में दुनू माई पूत के जाड़ कैटि रहलै..

माय: -(कम्बल उठाबैत )उँ.. रौ बौआ तू नै त पैन तैन हेरा देलही.. देखही त ईहो कम्बल ऐकटा छलौ सेहो आधा भिजी गेलौ.. आब कि ओढ़बेँ राईत में...

मंगनू: -नै गै माय.. हम नै भिजेलियौ..(डेराईत )माय गै... तहन त राईत में बड जाड़ हेतै न... ??

माय: -नै हेतै... तू सुखलाहा दिसन सँ ओढि लिहेँ...

मंगनू: -आ तू...????

हमरा भअ जेतै जेना तेना...

(किछु नै बाजल मंगनू.. सायद मायक बात पुरा तरहेँ नै बुझि सकल बच्चाक बुईध.. सुखलाहा दिसन बेटा के ओढाबैय आ भिजलाहा दिसन सँ अपने ओढै के बीच मायक ममता. त्यागक त एकटा छोट सन उदाहरण मात्र सोझाँ आयल... मायक ममता त्यागक परिभाषा त मानव कोन स्वयं भगवानों संपूर्णताक संग देबा में असमर्थ छैथि... )

मंगनू: -(अपन पूरना घर मोन पारैत )माय गै.. ई भुकम्प किया होई छै.. ??

माय: -कि जानै गेलियै... बाबू अहाँ पढब लिखब, नमहर होएब त अपने सबटा बुझि जाएब...

मंगनू: -कहिया स पढबै हम...???

माय: -जल्दिये... आब सरकारी स्कूल में पढब अहाँ...

मंगनू: -उँ.. गामक सरकारी स्कूल त टूटल फूटल छै... टूटलाहा दबाल दिसन स बरखो क पैन आईब जाई छै.. माय गै..........
जार बड हेतै न सरकारी स्कूल में... 
एकटा जैकेट किन दे न हमरा...

माय: -(कोंढ जेना फाईट गेलै धनमाया के )तोरा त स्वीटर छौहे न बौआ...

मंगनू: -उँ... ओएह.. एक्केटा. सेहो फाटल...

माय: -आईग नै कोरही... चुपचाप बैस न... देखही न आब सरकार कहै छै सबके सीरक, कंम्बल, अन पैन सबटा बँटतै... 
कि पता तोरा एकटा जैकेटे द दौ...

मंगनू: -माय गै... ई सरकार के होई छै.. ??

माय: -देश के बरका लोक सब सरकार होई छै...

मंगनू: -(कँपकपाईत )ऊऊऊ...स्ससस ...........
जार बड होई छै.... 
माई गै...

माय: --की...??

मंगनू: -सरकार के... जाड़ नै होई छै.??

(नि:शब्द )
(जबाब चाही... मंगनू के )