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शिक्षक..... आ कि, संचालक... धन्यवादक पात्र छी अपने सब....

शिक्षक..... आ कि, 
संचालक...

धन्यवादक पात्र छी अपने सब.... 
चुकि, 
जाहि तरहें अहाँ सब सरकारी स्कूल के शिक्षक रैहितो अपन संपूर्ण समय प्राइवेट स्कूल के संचालन पाछु खरैच रहलौं.... . से सत्ते पैघ बात अई.

हहह... की करबै.. समाज में रैहितो जौं समाज के काज नै आबी त कथी के मनुख भेलौं... से क रहल छी समाज सेवा...

हँ हँ... किएक नहिं...समाज सेवा के संग संग डबल आम्दनी सेहो किने... 
मुदा.. श्री मान, 
समय के कोना मिलाबैत छी अपने सब ... मतलब सरकारी स्कूल स कोना आ कतेक समय भेटैत अई जे अपन निजी स्कूल के सेहो भरपूर समय द पबैत छी अहाँ सब....

हहह.. भ जाईत छै जेना तेना.. चुकि समाज में हमहूँ छी आ समाज के खातिर नीक सोच राखने छी से मैनेज भ जाईत छै...

ऐहि मैनेज के कारण... चाह पानक दोकान जेना जत्र तत्र पसरल अई प्राईवेट स्कूलक संजाल.. 
जाहि में सरकारी स्कूल के शिक्षक सब सेहो संचालक बैनि, घरे घर जा क अभिभावक सब के झूठ फुसक पाठ पढा के अपन निजी स्कुलक खातिर जैहि तरहें विद्यार्थी जम्मा करबाक अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा क रहल अई... देखि के घिन्न सन लागत..... 
विद्यालय में स्टेशनरी ---जुत्ता जुराब. टाई बेल्ट. वा कोनो भी समान बेचबाक कोनो भी प्रावधान नै रैहितो में 
..सब तरहें सब सामग्री मनमाना दाम में बेचि रहल ई निजी स्कूल के संचालक सब.. 
..
गुण स्तर बिना के टाई बेल्ट वा अन्य सामग्री स्कूल के नाम आ लोगो के संग मनमाना दाम पर खरीद करबाक लेल बाध्य बनल अई विद्यार्थी सब. 
..बाहर के समान बिना स्कूल के निर्देश सँ नहिं खरीद क सकैछ कियो.... 
कोनो भी नियम कानुनक दायरा सँ दूर... अपन निजी स्कूल के निजी नियमानुसार चैलि रहल अई प्राइवेट स्कूल सब पर कोनो अंकुश कियाक नहिं....

निजी स्कूल के संचालक सब अपन स्कूलक वकालत करैत सरकारी आ प्राइवेट स्कूल के नकारात्मक आ सकारात्मक विषय पर सेहो बैढि चैढि के चर्चा परिचर्चा करैत अई... 
खास क के सरकारी स्कूल के अपेक्षा प्राइवेट स्कूल के रिजल्ट पर बेसी जोर.मारैत अई ई संचालक.महोदय सब

बच्चा सबहक उज्ज्वल भविष्य के वास्ता दैत सरकारी स्कूल के शिक्षक सब प्राईवेट स्कूल के संचालक बैनिअभिभावक सब सँ मनमाना शुल्क असुल क के कहबैका कहबा रहल.....

करोरों रूपैया के लगानी में बनल सरकारी स्कूल के दशा दयनिय बनल अई... विद्यार्थी के उपस्थिति न्युन अई... रिजल्ट नहिं के बराबर....

किएक नै. .
स्कुल के शिक्षक सब त शिक्षा के दलाली तरफ लागि परल अई.... 
आ, 
समाज....

हहह... 
अरे, सरकारी स्कूल में त गरीब गोईर के बच्चा सब पढैत छै... से अवधारण बनल छै समाज में...

एक दोसराक देखा सुनी में.... जकर आर्थिक स्थिति कमजोर छै सेहो समाज सँ अवहेलित हेबाक डरे जेना तेना अपना बच्चाक पढाई प्राईवेट स्कूल में करबा रहल... 
मुदा 
सरकारी स्कूल के शिक्षक प्रति कोनों आक्रोश नै समाज में...

जेकर मुख्य उद्देश्य पैसा कमेबाक छै.

घरे घर जा क विद्यार्थी जम्मा क के पैसा कमेनाई मात्र अपन उद्देश्य बुझनिहार ऐहि संचालक सब के समाज कियाक नै कहैछ जे... 
शैक्षिक छेत्र में सुधारक संग संग विद्यालय के वातावरण आ भौतिक संरचना पर सेहो ध्यान दी.... 
विद्यार्थी के छमता अभि वृद्धि के ध्यान राखी...

शिक्षक... 
भौतिक पुर्वाधार..
आ राजनीतिकरण के कारण सरकारी स्कूल के रिजल्ट आ व्यवस्था कमजोर भ गेल अई.... 
संगहि, 
सरकारी स्कूल के व्यवस्था कमजोर करबाक पाछु सरकारी स्कूल के शिक्षक सबहक बेसी हाथ अई जे अपन निजी स्कूल के खातिर सब तरहें सरकारी स्कूल के शिक्षा व्यवस्था खराब करबाक पाछु परल अई...

दुखद जे समाज ऐहि प्रति मौन बनल अई...

शिक्षा मंत्रालय आ कानुन व्यवस्था के कमजोरी के कारण ऐहि तरहक कृयाकलाप दिनोदिन फलिभुत भ रहल....

समाजआ सरकार के अपन आँखि खोलक चाही.

अन्यथा... समाज त ठकाईते रहत... संग संग,, 
सरकारी स्कूल..
शिक्षक सबहक तलब तनख़्वाह आ संकीर्ण राजनिति करबाक अड्डा बैनि के रैहि जाएत..