सुगरमारा काण्ड... ..

सुगरमारा काण्ड... ..

हँ,
से तो कहबे करते हैं कि बहुते बरका गलती कर दिये हैं हम सब.. .
और अपने धरम करम, अपने ईज्जत प्रतिष्ठा की हिफाजत करना गलत है तो ई गलती हम सब बेर बेर करते हि रहेंगे... 
चाहे ईसके खातिर हम सभी को जेले काहे न जाना परे...

तामस सँ लह लहाईत मिंन्टू बाबू के बात पर समुच्चा गामक लोक अपन अपन हाथ उपर उठा के स्वीकृति देमय लागल...

बरा बाबू (दरौगा)संगहि संपूर्ण थाना स्टाफ बुझू उठि कए आबि गेल रहै गामक छोटका स्कूल पर.. 
संगहि गाम भैरिक लोकक उपस्थिति, गामक एकता के निक्कहि दर्शा रहल.....

गामक एकजुटता देखि बरा बाबू सेहो जेना.............. 
ऐसा बोलने से नहिं ना होगा जी, 
जानते हैं उ सब का केश कितना खराब होता है.. 
 अरे,उ लोग सब परानी हुँवाँ थाना पर जाकर पेटकुनियाँ दिया हुआ है,.. 
बात उपर तक पहुँच गया है... अरे कुछो भी हो ईस तरह से नहिं ना करना चाहिए,, 
सब फँस जाईयेगा... 
जानते हैं प्रशासन को भी उ सब का हि साथ देना परेगा....

फुफकाईर उठलाह मिंटू बाबू.... 
ईसका मतलब उ सब मनमानी करेगा और हमलोग चुपचाप देखते रहेंगे.. 
कानुन प्रशासन सब के है न साहेब... 
ईतना जान लिजिए.. कि अपने धरम करम कि रक्छा के लिए आज सत्रह ठो मारे हैं कल सत्ताईस ठो मारेंगे... 
भले हि प्रशासन हमलोगों को फाँसीये पर काहे न चढा दे...

अरे क्या पगलपनी जैसन बात करते हैं... 
आखिर कुनौं नियम कानून है कि नहिं.. 
बार बार कह रहे हैं न फँस जाईयेगा आप लोग, तो समझते काहे नहिं हैं.. क्या बुझते हैं, आपलोग ईस तरह से मार ते रहेंगे और पुलिस प्रशासन चुपचाप बैठकर तमाशा देखेगा..

नहिं साहेब, हम सब को लाईन में ठार करके एक तरफ से गोली दाग दिजीए... 
काहे कि बरका अपराधी हैं न हम सब

आखिर भेलै की.. ...

अरे नै बुझलियै...

लोक के अपन निजी संस्कारक बात होऊ आकि छैठ परमेश्वरी के पुजा अर्चना... 
आदि काल सँ डोम जातिक विसेष पहल होईते आबि रहल अई... 
आ सुरूअहि सँ डोम जातिक लोक मवेसी पालन के रूप में सुगर (सुअर)पालन करैत आबि रहल अई... 
तहन पहिने के अपेक्छा वर्तमानक परिवेष में सुगर पालन में सेहो अंतर आबि गेल अई.... 
पहिने हेंजक हेंज सुगरक संग दू तीन टा सुगर चरबाह सेहो रहैत रहै, 
जे भैरि दिन सुगर चराबय आ गाम घर में घुमि फिरी के बाँसक बनल छिट्टा सूप फुलडाली आ कतेको समान बेचि क अपन आय अर्जन करैत साँझू पहर में सबटा सुगर के हाँकने अपन गन्तव्य जगह पर ल के चैल जाईत रहय..... 
गाम घर पर सुगर प्रवेश निषेध मानल जाईत रहैक.... 
आब.... 
नवका रिति रिवाजक संग नव ढ़ंगे सुगर पालन कएल जाईत अई... 
सुगरक संग चरबाहक कोनों आवस्यकता नहिं, 
हेंजक हेंज सुगर के अनेरूआ छोरि देल जाईत छै... 
जे राईत दिन सदिखन बारी झारी सँ ल के आँगन घर तक में सहजहिं देखा पैरि जाईछ.... 
खेत खरिहानक फसल सँ ल के बारी झारी में लागल साग सब्जी तक के नष्ट करबा में कोनो टा कसैर नै छोरैछ ई अनेरूआ सुगरक हुजूम....... 
सुगरक मालिक (डोम)अपना जरूरतक हिसाबे कहियो काल आबि क दु चारि टा के पकैर के ल गेल .....
लोक कतबहु किछु कहौक ऐकरा लेल धैन सन.....

भरत बाबू के दरबज्जा पर राईतुक समय कियो पुरूख पात नै रहै छै, तकर पूर्ण लाभ उठाबैत परसुकी राईत एकटा सुगराही ऐहि दरबज्जा के अपन सोईरी घर बना लेलक आ छ: टा बच्चा के जनम द अपन परसौती के कर्तव्य निर्वाहन करय लागल ओहि ठाम... 
भोरे भोर हंगामा लोक जमा भ गेलै, नैंर पुरैन लागले ओहि छबो टा जनमासू चिलका के दखै लेल....

बाप रे....

बाप रै, करै छी....

ओतबहि नै...

पंडितजी कका हाथ में अछिंजल आ फुलडाली नेने गोसाउनिक पुजा लेल भगवती घर प्रवेस केलैन की ऐकटा मोटे सन सुगर के बिच्चहि घर में भिसिन्ड भेल परल देखलखिन..... 
चुकि भगवतीक घर पुजा पाठक समय मात्रे खुजैत छलै.. राईत विराईत केखनो पाछु के टाट तोरि के ओ सुगर गोसाउनिक घर में प्रवेश क गेल रहय... 
समुच्चा घर के कोईर काईर के बुझू एकबट्ट क देने रहैक... 
केबार खोलिते, पंडीतजी कका के देहे पर सँ फाईन क ओ सुगर बाहर परा गेलै... 
पंडीतजी कका त बुझू अवाके रैहि गेलाह.. 
तीन चाईर दिन धैरि अन्न जल त्यागि देने रहथिन, 
गंगा स्नानक बाद कतेको पुजा पाठ होम जाप सब सँ मोन चित स्थिर केलाह पंडीतजी कका....

तखन...

तखन की.... 
सुगरक त्रास सँ नाकोदम भेल गौवाँ सब एकजुट भेल... दोसर कोनों उपाय नै रैहि गेलै लोक सब लग.... 
फलस्वरूप...... 
सुगरमारा काण्ड..

ओ...तैं दु दिन सँ गाम घर पर सुगरक उपद्रब नै भ रहलै....

हेतै कोना... सुगरमारा काण्ड में निपत्ता भ गेल सबटा.....

आब.......?

आब त देखबे करै छियै..... 
बाहुल्य.......
बहुमत........

ईति सुगरमारा काण्ड प्रथमोध्याय समाप्तम् .............
संतोषी.