चिकनगुनिया.......कनियाँ

चिकनगुनिया.......कनियाँ

अकश्मात...

हाथ पएर जेना झुनझुनाए लगलै ओकर....
देहक संपूर्ण जोर जेना तोर मारय लगलै....
समुच्चा देह तेना काँपय लगलै जेना बुझना जाई कोनो जाने नै रैहि गेलै ओकरा में...

.35के स्पीड में चलैत मोटरसाईकिल धैरि कहुना रोकि लेलक ओ.... 
मुदा स्टेण्ड पर ठार नै क सकलै आ मोटरसाईकिल संगहि धम्म सँ खैसि परल जमीन पर ओ.......

दू चारि टा बटोही सब दौरि के केहुना उठा क ठार क देलकै ओकरा...

भाई चोट तो नहीं लगा ना...... (एक गोटे पुछलकै )

नहीं.. .ठीक हूँ.. मैं.. 
 कहुना ओकरा मुँह स निकैल सकलै....

साला ..पी के बाईक चलाता है... मरेगा किसी दिन...

बगल स कहैत एक गोटे आगू निकैल गेलै...

दस मिनट सुस्तेलक आ कहुना कहुना घर पर धैरि पहुँचल....

पापा आ गये... पापा आ गये... दुनू बेटा घरक बाहरे ओकर दुनू कन्हा पकैर के झूलय लगलै...

एक मोन त भेलै जे दुनू छौंरा के झमैर क फेंक दियै केम्हरो...

मुदा किछु तेहेन सन करबाक लेल ओ असमर्थ अई... 
आय ओकरा पछताबा सेहो भ रहलै, जे किया दुनू टा छौंरा के देह पोसै खातिर केरा दुध ठूसाबैत रहैत अई ओ....

बड जीबटगर भ गेलै दुनू टा छौरा... 
डेग नै ससरय देलकै ओकर....

आन दिन त दुनू के काँख में उठेने उठेने कतय स कतय घुमि अबैत छल ओ...

मुदा आय....
घरक गेट पार नै क सकलै ...
आ ...
धप्प सँ बैसि गेल ओ ओहि ठाम...
मुँह स आबाजो नै निकैल सकलै...

चिचीया उठलै दुनू छौरा... 
मम्मी... मम्मी...

दौरली कनियाँ घर सँ.... .
की भेलै......

लाल बुझक्कैरि आबिते जेना सबटा बुईझ गेलखिन.....

जो... तू दुनू.. भीतर जो...

दुनू बच्चाक प्रस्थान संगहि, 
 भरल पूरल कनियाँ फूईट परलीह....

सबटा बुझहै छी अहाँक नाटक हम... 
फेर कतौह ढ़ारने होएब... छुछुन्नर बला चाईल नै नै छुटत अहाँके.... 
सोधनमा सोईध लेतै सबटा... 
उठू न आब.... 
की एत्तहि गैर जाएब माईट में....

आय एकरा सेहेन्ता भ रहलै जे धेल्ले चाट कनियाँ के कनपट्टी में ध दियै....
आ खूब जोर सँ चीचीया क एक्कहि टा शब्द कहियैक. ... 
चू.........प.....

मुदा नहिं... 
एकर सरीर आ एकर जुवान आय एकर सेहेन्ता पूरा नै क सकलै...

समुच्चा देह फुल सन हल्लूक... हवा में उरैत बुझना जाई एकरा...

गीट्ठह...गीट्ठह... दुखि रहलै एकर......

घींच तीर के कनियाँ भीतर धैरि ल गेलै एकरा......

ओछ्यान पर पेटकुनिया द बेसुध सन पैरि रहल ओ. ..

कतेको बेर कनियाँ आबेस करैत कहलकै जे उठि के चलू बाथरूम... 
साबून स रगैड़ के नहा दैत छी....
भक टूटत ..

कनियाँक आवेसक प्रत्युत्तर देबाक स्थिति में कहाँ छल ओ... 
बस कातर नजैरि सँ निहारि रहल कनियाँ के........

अपना दिसन एतेक वेकलता सँ ताकैत देखि कनियाँक कोमल हृदय पसीज गेलै जेना....

अछ: नै नहाएब त नै नहाउ.... 
कनि काल सुईत रहू अनठा क....

ओह...बचलौंह...

तेहेने आभास भेलै ओकरा... 
दुनू आँखि बन्द क आब निश्चिंत स पैरि रहल ओ.......

सुतली राईत एकर पएर जाँतैत कनियाँ के मोन में बरका उदवेग उठि रहलै..... 
कतेक काल बिति गेल पएर जाँतैत... आई किएक नै सब दिनुके सन ई घींच के ओछ्यान पर खसा लेलक हमरा.... 
नै कोनो उकटा पैंची...
नै कोनो लट्टा पट्टी... आखिर आई की भेलै एहेन.... पीलाक बाद एहि मामला में औरो बेसी झंझटिया लोक आई एना किएक घत लाधने अई.....

कहीं...... हँ ओएह बात छियै... पक्का ओएह बात छियैह...

नै जानि,, 
की फुरा गेलै कनियाँ के... झकझोरि के उठाबय लगलै ओकरा....

यौ... यौ....

उँ...
.एतबा कैहि सकल ओ..

आकि...
फुईज गेलै लाऊडस्पीकर....

सबटा बुझहै छी अहाँके नाटक हम.....
. अहाँ एतेक खेल बेल दोसर के जानत दुनियाँ में...... जहिया स ओ मौगी अहाँक औफिस जा लागल तहिया स. सबटा रंग ढ़ंग बदैल गेल अहाँके..
.. कोन कोदैर पारैत रहियै आफिस मे अहाँ जे डाँरो पीठ नै उठैये..... 
हमरा कोनो हाट बजार स कीन के नै आनने छी..
चिनहै छियै न हमरा भाई बाप के..
. की करत सेहो बुझहै छियै न.... 
क्रमश:.....

एम्हर...
एकर माथ जेना फाटय लगलै...

मोन होई जे धूह धूह धधकैत आगि में कुईद परी.....

आ कि ऐहि मौगी के......

मुदा नहिं....
. नि:सब्द भेल परल रहल ओ... 
दुनू आँखि सँ विवशताक नोर बैहि रहलै ओकरा...

तेहेन में...

संतोष कुमार संतोषी केर लिखल एकटा गीत सहजहि मोन पैरि रहलै ओकरा...

कनियाँ कनियें होई छै बौआ, बेसी नै बुझिह...

पहिने त बड़ मीठगर लगथुन, एथुन पएर दबेथुन.. 
बाद में ओ मनमानी करथुन, अप्पन पएर बढ़ेथुन... 
पुरूषार्थ के रक्छा खातिर पएर नै ओकर दबबिह...

कनियाँ कनियें होई छै बौआ, बेसी नै बुझिह.....

सब दिने कनियाँ के बेसी बुझैत आबि रहल ओ.. 
जकर पूर्ण फल प्राप्त भ रहलै ओकरा ...

भोर होईते बरका भैया के फोन क के बजौलक... 
हास्पीटल जा क चेक जाँच करौलक...

चिकनगुनिया रोग स ग्रसित भेल छल ओ...

डाक्टरक सुझाव संग घर आबि गेल रहय ओ... 
बरका भैया सेहो बुझा सुझा क हिदायत सब द क. चैलि गेल रहैथि...

बड़ प्रेम स कनियाँ पुछलकै ओकरा... 
की सब कहलक डाक्टर... किछु खएबाक मोन नै होईये... राइतो नै खेलौं.....

ऐं....ओ.... चिकन.... गु........

एतबहि में लोईक लेलकै कनियाँ....

यौ लाजो नै होईये कोनो गत्तर में अहाँ के.... 
राईत स ऐहेन हालत य... एखने डाक्टर के देखा क एलौं हन...
. आ चिकन खाई के मोन भ गेल....
किया नै ..
कहियौ न ककरहु..
जे चिकन संग संग एकटा बरका बोतलो औरो आनि देत जे ढ़ारि लेब बैस के... 
जरलाहा एहेन लोक नै देखलियै कत्तहु..
. जकर एहेन हालत रहतै से चिकन के बात करतै.... 
जाऊ न औफिस ओतय त राखले य एकटा चिकन चमेली... ठूसब खूब....

बर्दास्तक बान्ह जेना टुईट गेलै ओकर...
खूब जोर सँ चीचीया उठल ओ....

चू......प.........

..(हँ एहि बेर त आवाजो संग देलकै ओकर)

संपूर्ण ताकत लगा क एक्कहि साँस में चारि लाईन बाजि गेल ओ.. ...

चिकनगुनिया नामक बिमारी भ गेल अई हमरा... 
डाक्टर कहलक तीन महिना तक ई रोग एहिना रहतौ... 
मुदा... 
तू... 
तू त... तीने दिन में हमरा खतम क देमें गै मौगी.....

तू कनियाँ नै.. चिकनगुनिया छियैं गै.........

(एहि बेर ओकरा स पहिने कनियाँ बेचारी धप्प सँ बैसि रहली जमीन पर.. )संतोषी