सरबे हौ... भन्नहि भेल्लह

गधकिच्चन.......!!

सरबे हौ...... भन्नहि भेल्लह. !!

सहर नगर जे जतय छी ऐहिबेर, 
चलै चलू सब गाम !

अपना मोनक मुखिया चुनबै, 
करबै जनहित कल्याण !!

अपना करम के धुनलह -
मुखिया त मोनहि के चुनलह !

आब की.... ठूठूआ नै लेल्लह.. 
सरबे हौ... भन्नहि भेल्लह !!

एकजुटता दर्शाबैत तहूँ, खूब कमेलह अप्पन नाम!

सेहो नाम डूबैत नै देरी, उल्टे आब भेलह बदनाम !

बुझाई छह हित केलह तू... 
रै उल्टे चीत्त भेलह तू..

आब की ...सुथनी नै पेल्लह...

सरबे हौ.... भन्नहि भेल्लह !!

देखैत न रहियौ, हेबे करतै - 
कतेक गेबह तू गेलहे गाण...

मधुरक पाछू ऐँठचट्टा सब, 
खाय थूकरै फोकट के पान...

कहै छह बिकाश होगा.. जतय अई घर घर मौगा...

आब की... उलटन नै केल्लह..

सरबे हौ... भन्नहि भेल्लह !!

मुखिया सँ उप मुखिया भारी, 
वार्डक अलगहि शान...

मुँहलगुआ पछलगुआ भल हो, 
पाबि रहल तरघुसकी दान...

जतय भैरि गामे अन्हरा.. 
ततय की हेतै रै बनरा...

आब की.. दूनू हाथे नै खेल्लह. ..
सरबे हौ...भन्नहि भेल्लह... !!

पीट रहल अभिमानी जाहि ठाम, 
नीज अभिमानक डंका..

जनमासुए उनचास हाथ ,
से नगर हेतै न लंका..

पढल सब फुईसक पोथी.. 
चलाबै अपनहि थोथी...

आब की... कल्याण नै केल्लह... 
सरबे हौ... भन्नहि भेल्लह.. !!

घंटी बजबय, सब ढोलहा पीटय...
बाबा के छल हाथी...

निज मोनक मंशा कत फाँसब.. 
ईत उत बनसी पाथी...

लाजो देखि लजाईये...
मुदा के बाज आबैये...

आब की. .अप्पन बस नाक कटेल्लह...

सरबे हौ... भन्नहि भेल्लह. !!

मुखिया जी छैथि ध्यान में लागल, 
बना रहला अप्पन पहिचान.. .

मंदिर महजिद दौर लगा क - 
देखा रहला अप्पन सतकाम...

से मंदिर बनल अखारा.. 
चलय दिन राईत भभारा... 
आब की.. फूबकी नै बहरेल्लह.... 
सरबे हौ....भन्नहि भेल्लह... !!

चोरबा मोन जत खेतहि उपजय, 
हगबासहु लागल ताला...

जे बेईमानिक रंग रंगायल, तकरा लेल कोन केबाला...

बुझत के हँसी ठट्ठा... 
जतय घरही बपजेट्ठा...

आब की.. सोच हरेल्लह... 
सरबे हौ.. भन्नहि भेल्लह !!

कुम्भकरणी निंद्रा सँ जहिया, जगतै लोक आ बनतै बिचार....

लाठी ठेंगा कलमक जोरे, छीन लेतहि सब निज अधिकार...

चलबाजक चाईल नै चलतै.. 
दगबाजक दाईल नै गलतै...

आब की... अपन डेगो नै बढेल्लह... 
सरबे हौ.. भन्नहि भेल्लह. !!

गन्हाएल सन राजनीति, गन्हकाबि रहल भैरि गाम...

आगू आबि बाजत के योद्धा, 
दिन केकर छै बाम...

लिखल ई पैंति बड चिक्कन. ..
.बुझलहुँ.. हेत्तहि गधकिच्चन ...

आब की... आँगूर फेरिओकरहि धेल्लह..
.. 
सरबे हौ... भन्नहि भेल्लह !!संतोषी.