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तीन शुत्र....... !!

तीन शुत्र....... !!
शिव शिष्यता प्रदान कराबैछ... 
समस्त गुरू भाई बहिन के प्रणाम!!

शिव एखनहुँ गुरू छैथि.... 
जय हो....

(एकटा गुरू भाई सँ भेल बातचीत के किछु अंश....)

शिव ,
जगत गुरू छैथि... से त मानै छियै न अहाँ...

हँ यौ... हम कोनों नाश्तिक छी... भगवानक प्रति हमरहु श्रद्धा भाव अछि.. आ ताहू में... 
देवों का देव.. 
महादेव....
मुदा ,,जगत गूरू के बात फैरिछा क कहू...

अरे,, 
जगत गुरू माने संपूर्ण जगतक... समुच्चा संसारक गुरू छैथि शिव......

ओ.... बुझलौं न आब... त कहू हमरा की कहय चाहै छी....

अहाँ किया नै शिव शिष्य बनै छीयै... अहूँ शिव के अपन गुरू बनाबू.....

हम फेर नै बुझलौं.... अहाँक बात...

धूह.... छोरू..... सात बेर एक्कहि बात के घोंसै छी ..नै बुझलौं नै बुझलौं करै छी... हम त अहीं लेल कहै छी जे शिव के गुरू बनाऊ... तीन शूत्र करू... तीन महिना भितर काया पलट नै भ जाय त कहब हमरा....

से त तीन शुत्र हम करबे टा करब.... मुदा,,

फेर आब... मुदा की....??

मतलब शिव के अपन गुरू बनबैह परतै हमरा.. सेएह किने...

हँ...

तहन ओ जगत गुरू.. माने संसार भैरि के गूरू कोना भेलखिन... 
अहीं कहै छी जे शिव संपूर्ण संसारक गुरू छथिन.. त हम ऐहि संसार सँ बाहर छियै जे हमरा बनबैह परतै... 
अरे, संसार में हमहूँ न छियै यौ... त हमरहु गुरू भेलखिन की नै... तहन हमरा बनबै लेल किया कहै छी... 
हम त छीहे न हुनकर शिष्य.... आ कि नै...

धू... बड फजगज्जी बला लोक छी अहाँ... के एतेक माथा के धून्नत.....

सुनू न यौ....

भक्क... जाय दियह हमरा औरो काज सब अई....

(माफ करी...आस्था पैघ बात छै... हम जानकारी लेबा लेल मात्र लिखी रहल छी) प्रणाम!! गुरू भाई.. 
जानकारी कराबी हमरा... 
शिव के गुरू बनबहि परत की.... 
शिव स्वतह हमर गुरू छैॆथि..... संतोषी.