भक्क..... बकलेलही......

भक्क..... 
बकलेलही.... 
से बात नै छै...

अहाँ रहैत के रहतै मोन में, 
दोसर के पेतै स्थान.... 
लछ्मीनीयाँ मोर अपनहि सुन्नैरि, 
अन्त:कोना के जेतै ध्यान....

उँहूँ..... नै यौ.....

नवका पर कोनो संगबैहि छी हम, 
संग रहैत आब भेलहुँ पुरान..... 
कोन खेल बेल में लगल रहै छी, 
से सबटा अई हमरहु संग्यान......

भक्क.... 
बकलेलही..... 
से बात नै छै.....

ओ एहिना बस कथी के खेल बेल, 
झूठे के द रहल छी तान...... 
सख सेहन्ता सपना हम्मर, 
अहीं छी हमरा मोनक चान.....

उँहूँ... नै यौ.....

परतारै छी मोन हमर आ, 
चलबै छी मीठ बोलीक बाण....... 
लाज नै होईये कोनो गत्तर में, 
कान्ह बराबर भेल संतान......

भक्क ....
बकलेलही..... 
से बात नै छै......

फ्राईण्ड छियै बस ततबहि बुझियौ, 
ध पकरै छी दुनूह कान..... 
गधकिच्चन में की लागल छी, 
फुसियें क रहलौं बदनाम.......

उँहूँ... नै यौ........

सप्पत पर सप्पत बरू खा ली, 
बातक हम नै राखब मान ......
पहिने आ आबक रंग ढ़ंग देखिके,
हमरहु भ रहलै पहिचान .......

भक्क ....
बकलेलही.....
से बात नै छै......

पहिने सन की रंग ढ़ंग देखबै,
वयस बितल बदलल परिधान .....
कोना होयत विस्वास अहाँ के ,
कहू त हम क ली विषपान .......

उँहूँ .....नै यौ.....

कोना क एहेन बात बजै छी,
ओहिना कहलौं हे भगवान .....
एम्हर ताकू लग त आबू,
हे अहीं में बसैय हमरहु प्राण.....

भक्क.....
बकलेलही......फेर ठकेलीह......संतोषी.