जय मिथिलेश्वरी...प्रणमाम्यहम्.....!!

जय मिथिलेश्वरी...प्रणमाम्यहम्.....!!

मैथिल नेता अफसर बाबू, 
अपनहिं लेल भ गेलाह बेहाल ...!
कियो नै मिथिला के देखनाहर, 
कहबै छैथि मिथिला के लाल...!!

अछि मैथिल जतय करोड़े -माय काइन रहल अई नोरे, 
धिक्कार एहेन बेटा के-अधिकार नै मांगय जोरे, 
आजुक जनमल राज्य बनल अई, 
मिथिला एखनहुँ किया सबाल .....!
कहै लए घर घर नेता सब छैथि, 
कियो नै माँ मिथिला के लाल......!!

हे यौ जनक सुता के भैया -किया सूतल छी अहाँ जागू, 
जौ डोली नेने अयोध्या -सीता के नैहर आनू, 
एम्हरे ताकि रहल छैथि सीता, 
भैया औता पुछता हाल.....! 
माय बेटी के भेंट करा क, 
बनू कियो मिथिला के लाल..!!

आऊ सपथ खाऊ सब मैथिल -हम मिथिला राज्य बनायब, 
ऐहि मातृभूमि खातिर हम -विद्या बंदूक उठायब, 
स्वर्ग सनक मिथिला नगरी लेल, 
प्राण जायत नै तकर मलाल......! 
भाईस रहल अई मिथिला नगरी, 
बचा लिया मिथिला के लाल....!!
जानकी नवमी के सुभकामना.......!!