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बाहर पैरि रहल सिम-सिम बरखाक बुन्न....

बाहर पैरि रहल सिम-सिम बरखाक बुन्न.... 
देखिते ओकरा अैँखि में बितलाहा पुरान अतीत सब जेना नाचय लगलैह..... 
अस्पतालक ईमरजेन्सी बेड नं. 104
में ओकर बीमार माई सात दिन बाद निनाएल सन लागि रहलै... 
सात दिन सँ बीमार माईक संग अस्पताल में रहैत रहैत स्वयं थाकल -हारलसन महसूस रहल अई... 
चाहक तलब जोर देने रहै ओकरा, 
मुदा बाहर बरखा के सीमसीमी देखि चुपचाप माईक पएर लग बैसि गेल रहय ....

बरखाक सिमसिमी देखिते ओकरा हृदय में वेदना के लहैरि उठि जाईत छैह ...
पश्चाताप के आईग में जरय लागैछ ..... 
कारण 
आई सँ लगभग सत्ताईस बरख पहिने.... 
सावनक महिना... 
माई- बाबूजी दूनू सहोदर भाई... (बरकू -छोटकू)

दुनूह भाई में दू बरखक अंतर रैहितो छोटकू एकरा सँ एक क्लास सीनियर छलैह.. 
छोटकू हमेशा फस्ट आबै लगातार चौथी में दू बेर पाँचबी में एक बेर फेल गेलाक कारणें अपने छोट भाई सँ एक क्लास जुनियर गेल रहैक.... 
छोटकू के तीव्र बुद्धि सँ प्रभावित स्कूल के मास्टर गाम भैरिक लोकक सिनेह सदैव ओकरा भेटैत रहैक... 
तकर कोनों बेसी दुख नै रहैक एकरा मोन में, 
मुदा घरहु में माई बाबू के लार प्यार- छोटकू के बेसी भेटैत देखि एकर मोन बेकल जाईत रहैक... 
ओहि दिन बाबूजी पाँच टा कापी तीन टा पेन छोटकू लेल दू टा कापी एकटा पेन एकरहु लेल बजार सँ किन के आनि देने रहथिन..... 
बाबूजी के सोझाँ एकर बोलीयो नै बहराई, मुदा माई पर अपन तामसक लहैरि झारि चित्त बुझा लैत रहय ...
गै बुढ़िया तोहरा सबके छोटके बेटा अपन छियौ....
हम कियो नै छियौह... देखलही बुढ़िया, बाबूओकरा लेल पाँच टा कापी तीन टा पेन हमरा लेल दू टा कापी एक टा पेन.... नैपढ़बौ हम से बुईझ लिही... 
रौ बाबू तहूँ छोटकू जेना मोन चित लगा पढ़ .... अछहऐहि बेर तू फस्ट करबिही तूहूँ जे सब कहबिही से बाबूजी आनि देथून तोहरो लेल....... भेलै आब..!!

माईक बात के अनसुना करैत बाहर दलान पर लपैक के चैल गेल रहय .... 
बरखाक बुन्न दलानक चार सँ टप टप चुअैत रहैय जकरा अपना हाथ में लोकैत छोटकू मुस्काईत मगन रहय अपना में.... 
ईहो चुपचाप मिझाएल घूर में सँ एकटा जरलाहा खोरनाठी उठा दलानक दवाल पर चींछ सब पारय लागल....

छोटकू एकर हरकत देखि कहलकै भैया दवाल पर कोयला चींछ नै पारही... माईकहैत छैह कोयला सँ चींछ पारनाई दोख होईत छैह.....

तूँ चुपचाप रह.... हम किछो करी तोरा की मतलब... 
बाबू जे तोरा पाँच टा कापी तीन टा पेन किन देलकौह तकर जोश दखबै छीही हमरा... चलतै में एकटा कापी एकटा पेन हमरा दे.... ला...तोरा पाँच टा हमरा तीने टा....

हमरा की मतलब... बाबूजी तहूँ ले ... हमराकी कहै छीही...

एकर मतलब नै देबही तू..... लग में राखल बाँसक करची उठा छोटकू के पएर पर सटाक माईर देलकै ... जोर सँ धकेल खसा देलकै ओकरा....

कानेत उठल छोटकू.. लग में इँटाक अध्धा टूकरा परल देखि उठा बजैर देलकै एकरा देह पर.....

हलाँकि दलानक कोन में सोन्हिया स्वयं के बचा लेलक इंटाक चोट सँ... बहन्ना बाजी शुरू देलकै... 
एकबेर चिचीया शांत गेल ... तेनानिशबद्ध सन पैरि रहल जेना कोनो जाने नै रैहि गेल होई ओकरा में.....

डेरा गेल छोटकू.... 
लग आबि स्थिर सँ उठेबाक प्रयास करय लागल अपना सहोदर के.... भैया....भैया..... रैभैया..... 
कोनो प्रतिकृृया नहिं देख घबरा गेलै बच्चाक मोन... 
बेर बेर छोटकू एकरा नाक लग हाथ राखि साँस गनबाक प्रयास करैक... मुदा नाक लग हाथ आबिते अपन सांस लेनाई बन्द दैत रहैक... 
कखनो काल पिपनी के तअरे छोटकू के हदाश उरल मुँह देखि भीतरे भीतर आनन्दित होईत रहय .... 
बुईझ गेलै छोटकू... जेहमरा हाथे बरकू भैयाक मृत्यु गेलैह... 
धिरे धिरे उठि ठार भेल छोटकू... 
बाहर बरखाक बुन्न नमहर गेल रहैक... 
दलान बहराईते समुच्चा भिजि गेल..छोटकू... छोटडेग नम्हर होमय लगलैह....जल्दिये ओकर डेग दौरै में तब्दील गेलैह... दौड़य लागल .. दिशाविहीन.... भागलजा रहल छोटकू....

छोटकू के एना भागल जाईत देखि, 
एम्हर, 
एकरहु मोन भितरक आनन्द निपत्ता गेलैह... 
हो दलान बहरा छोटकू के एम्हर उम्हर ताकय लागल.... 
साँझ पैरि गेलैह... 
कनैत खीजैत घर पर आबि गेल रहय... 
आबिते, बाबूजीपुछलकै एकरा... 
की भेलौ रौ... 
ककरा लैरि के एलें फेर.... के मारलकौह... 
एकर कानब सुईन माई सेहो घर बाहर आबि गेल रहैक.... 
रौ बाबू बरखा बुन्नी में कतय बौआईत रही.. . देखियौ कोना हाथ पएर ठिठुरि गेलै हन एकर .... चल झट कपरा बदैल ले... माई कहलकै ओकरा.. 
की.. 
दौड़ि माई के भैरि पाँज में पकैर लेलकै ... माई गै -छोटकू नै भेटै छौ कतहु... हिचकैत कहलकै माई के ...

दुनू भाई संगहि रही ... कतयचैल गेलैह तू नै देखलही...

सब बात सत्त सत्त माई बाबू के सुना देलकैह ....

तकरा बाद ..... समुच्चा गाम, धार पोखैर ईनार जंगल झार सौंसे तक्का हेरी सुरू गेलैह... मुदाछोटकू के कोनोंहु टा पत्ता नै चैलि सकलैह.....

माई कानैत कानैत बताह गेल रहैक...

एक दिन दू दिन पाँच दिन पन्द्रह दिन.... महिनासाल गेलैह मुदा छोटकू के कोनों खोज खबैरि नै चललैह....

बाबूजी के मरलाक बाद ओकर माई जेना पाथड़ गेल रहै...
हरदम बिमाड़े..... गैलि कांटो कांट गेल रहैक ओकर माई... तै पर बतहपनी... कोनोभी नव लोक के देखिते ओकरा छोटकू... छोटकू.....हमर बेटा.... हमर बेटा... कहैत भैरि पाँज में पकैरि लैत छलैह.... बुढ़िया....

भईया....... नर्स के आवाज ओकरा अतीत बाहर आनि देलकैह.... 
ऐँ... 
अरे कभी तो मरीज को अकेला छोर दो.... आराम करने दो... चलोनिकलो बाहर.... बरे डाक्टर साहब के आने का टाईम हो गया.... चलोबाहर.....

ताबत बरका डाक्टर आबि गेलैक.... रहने दो -रहने दो.... 
बरका डाक्टर साहब पहिले बेर आयल छैह आय... 
लग आबि नर्सक हाथ सँ कागज पत्तर उलटाबैत पुलटाबैत पुछलकै ओकरा...अभीक्या दिक्कत है ईनको....

धिरही सँ माई के उठाबैत कहलकै ... माई गै बरका डाक्टर साहेब आयल छथिन.. कीहोई छौ कहिन ... अपने...

ऐँ,,, कनेकबे आँखि खोलि देखलकै डाक्टर के ओकर माई... देखिते कहैत छै.... बेटा...हम्मर बेटा..... हम्मर बेटा.....

गै माई.. मोन स्थिर कर .... डाक्टर साहब छथिन.... 
की होईत छौह से कहून ....

किछु नै बुझैत छी बाबू.... बरबराईत कहलकै माई... आबहमरा गाम चलू... ओहि ठाम अपनहिं आंगनक तुलसी चौरा लग चैन मरब हम..... चलू बा... बू... ..... लू...

डाक्टर साहेब चेक जाँचक दौरान कने सिहैरि सन उठलाह...मरीजक पेट पर एकटा निशाना तेहेन रहैक जे निशान डाक्टर साहब अपना माईक पेट पर सेहो देखने रहय....

एमहर एकर माई फेर बरबराय लगलैह.....
हम्मर बेटा.... हम्म... ...बे... टा........बरकू....... छोट... कू....

बरकू... छोटकू.... सुनिते... 
डाक्टर साहेब भैरि पाँज में पकैरि लेलकै बुढ़िया के.... 
चिचीया लगलैह डाक्टर... 
गै माई..... हम छोटकू छियौह ...गैमाई.... 
तोहर बेटा छोटकू...... तोहरबेटा..... तोहरेबेटा......

गंगा जमुना बहय लगलैह सबहक आँखि ....

बरकू के गला सँ लागाबैत डाक्टर छोटकू कनैत कहलकै ऐकरा कान में.... भैयामरलिही नै तू...... 
दुनू भाई एक दोसर के पकैर झौहैरि करय लगलैह.....

छोटकू के देखि जल्दिये माई ठीक गेलैह... 
सारा वृतांत सुनेलकै छोटकू जे कोना दू दू दिन भुखले सहरक सड़क पर दौरैत रहल ... कोना एकटा व्यापारी ओकरा अपना घर गेलैह... कोना ओकरा पढ़ेलकै लिखेलकै... कोना, डाक्टर बनल .......!!

आय ईहो पश्चाताप के आईग सँ बाहर भेल महसूस रहल...... संतोषी.