ईनारक पैनि......

ईनारक पैनि......

पैनि सँ भरल लोटा उठाके मुँह लग लैते जेना केहेन दैन मँहक स्ट्ट सँ पैसि गेलै प्यासल जोखनाक नाक में...

गै गंगीया,,,
प्यास सँ कठ सुखायत घड़ी में  कोन सड़ल गन्हाएल पैनि पीबय लेल देलें हमरा...

रोज साँझ भिनसर  पैनि भरै छीयै... 
आय भोर में नै जा सकलियै ईनार परअखने सँझूकी पहर  भैर के आनलियै हनकि जानै गेलियै....

लोटा उठा  नाक लग लैते जेना सिहैरि उठल.... गंगीया! 
पक्का कोनो जानवर खैस के मोईर गेल हेतै ईनार में.... 
चिंताक रेखा गंगीयाक कपार पर सहजैहि देखा पैरि रहलै.... 
आब जाबत ईनारक साफ सफाई नै हेतै ताबत गंगीया  ओकरा सनक लोक सब कतय सँ पैनि भैरि के आनत ....
विमार जोखना  चारि दिन सँ घरे धेने छै... 
ठाकुरक दूनूह ईनार पर   पएरो नै राखि सकैछ... 
 एकटा ईनार गामक बाहर छै जाहि ठाम सँ गंगीया  ओकर जाति विरादरी के लोक सबहक लेल पैनि भरबाक छूट छै... 
बाकि दुनूह ईनार पर ......

गै गंगीया. .. ला.. ला ईयेह पैनि पिबी के कंठक त्रास मेटबय दे..

नै.. नै...बेमार में  पैनि  औरो बेमार बना देतह.. थमहह ने कने... देखै छियै हम.... ठाकुरक ईनार..

गै गंगीयामोन के किया पतियाबै छैं... कतय सँ आनबे एखन तू पैनि.. कि बुझै छिही... ठाकुरक ईनार में भिरहौ देतौह तोरा... 
बरू हाथ पएर तोरिके एकबट्ट कए देतहू...  कियो किछु नै  सकतै... एक के पाँच नेनिहार  सब पैनि देतैन्ह हिनका... गैघर में हम तू मरल परल रहबें  कियो केबार खटखटबै बला नै एतहु..  तू कन्हा देबाक बात करै छैं... गरीबक दुख के बुझहै छै...

जोखनाक तीत शब्द यथार्थ के दर्शन करा रहलै गंगीया के...

अल्पबुद्धि ईहो  नै बुझि रहलै जे ओही पैनि के आगि पर खदका  सरेलाक बाद पीबल जा सकै छै... 
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राईतुक नौ बाजि गेल रहै ......
थाकल झमारल मर मजदूर सब सुईत रहल रहैक... 
गंगीया हाथ में डोरी बाल्टी उठेने समधल डेग दैत बढ़ल जा रहल अई ठाकुरक ईनार तरफ...
 ठाकूरक दलान पर बैसल पाँच सात टा गप्पकर सब गफबाजी में लागल अई... 
मैदानी बहादूरी  नहिंये तहन कानुनी बहादूरी के गप्प करैत रहय  सब.... 
जे कतेक चलाकी सँ पुलिस के घूस खुआ  ठाकुर साहेब निर्दोश  गेल ओहि फूदनमा बला केश में...

हँ रै..  ओहि बला में....

कोन बला में रै...

बुईझ जाही .... ओही बला काण्ड में...

हँ हँ..... रै पैसो दै लेल तैयार भेलखिन ठाकूर बाबा... मुदा नै  मानलकै...

अरे नै मानलकै तकर नतिजा देखलिही की नै... 
पैसो गेलै .....

ओकरा सब के बात में लागल देखिगंगीया धिरहि धिरहि ईनारक तरफ बढ़य लागल.... 
ईनारक दुनू कात दू टा मोटका मोटका आमक गाछक कारणें अन्हार सन रहै ओहि ठाम जकर फायदा गंगीया के भेटि रहलै... 
गंगीया अपन हाथक डोरी के सरियाबैतबाल्टी के धिरहि सँ ईनार में...... 
कि तखनहिं,, 
गंगीया के एकटा आहट सन बुझा परलै... 
हृदयक ढ़ूकढ़ूकी बैढ़ि गेलै ओकर...जौं कियो देख लेतै ओकरा.. ..मोन पैरि गेलै गंगीया के जे कोना एक बाल्टी पैन भरबाक अपराध में मगहू के कोना पटैक पटैक के मारने रहै  सब... महिना भैरिबेचारा खूनक उल्टी करैत करैत आखिर कार मोरिये गेलै... 
की जानै कहिया दया एतै एकरा सबके लोकक प्रति...

दू टा महिला ईनार पर पैनि भरय आबि गेलै जेकर आहट सुनिते गंगीया झट सँ गाछक दोघ में स्वयं के नुका नेने रहय.... 
 दूनू महिला उच्च (पैघ)घरक लोक बेद छलै जेकरा ओहि ईनार सँ पैनि भरबाक पूर्ण आजादी रहैक.... 
दूनू महिला पैनि भरबाक क्रम में खुसूर  फूसर सेहो  रहलै...

सब के खुआ पीया  अपनहिं दू कअर भात  के बैसलौंह की हूकूम  गेलै......ताजा पैनि चाही... 
मौगी मेहैरि  एक छन जे कतौ बैसल की जलन जेना भए जाई छै पुरूख पात के...

से सत्ते..... पैनि भरबाक गप नै छै... पैनि  राखले छै भरल... बस हुकूम चलबाक चाही... नोकरहु सँ बत्तर हमरा सबहक जीवन....

यै नोकर नै  की छियै अपना सब... भैरि देह वस्तर  भैरि पेट भातक बदला जीवन भैरि नोकरीये  करै छी अपना सब.....

धौर...बाजैत अपनहु लाज होईत अई... की सब कहब  की नहिं कहब... ऐहि पुरूखक देल धौजन सब.....

निश्बद्ध गंगीया सेहो सोचि रहल जे मौगी के जीवन सगरहु समाने अई... 
 सब  बरका घरक लोक बेद छियै.... 
कथीके बरका.... सोचक वेग जेना तेज  गेला गंगीया के.... 
ऐहि ठाम  एक  बैढ़ि  एक ठगी केनिहार सब अई.. 
ईयेह ठाकूरक बेटा दियार बाली के खस्सी माईर के खा गेलै.... 
ईयेह पंडीत जी के दलान पर भैरि दिन ताश  जुआ के खेल खेलल जाई छै.. 
ईयेह दोकान बला मालिक बाबू धी में तेल फेंटि  बेचैत छै.... 
चोर जालसाज रैहितो उल्टे मुद्दा चलेनिहार सब बरका  
भाग तकदीर सँ ठकाएल गंगीया सन लोक छोटका.... 
हँ,
 बात अलग छै जे बरकहु में सब एक्कहि रंग नै अईकिछु भलमानुष सब सेहो छै मुदा बाहुवली के ऐहि पाखण्डक बीच ओकरा सबहक माइने कोन.....

गंगीयाक ऐहि गुईन धुईनिक बीच  दुनू महिला पैनि तैनि भैरि  चैल गेल रहैक.... 
अन्ततभगवान के सुमिरैत गंगीया बहराएल गाछक दोघ सँ, 
 जी जान के मजबूत करैत धिरहि धिरही डोरी में बान्हल बाल्टी के ईनार में खसबय लागल.... 
बाल्टी में पैनि भैरितेतावर तोर डोरी के खींचय लागल ....
ऐतेक जल्दी  कोनो पहलमानो नै उपर आनि सकैछ पैनि सँ भरल बाल्टी... 
जूगता  ईनारक मुह तक आयल बाल्टी के हाथ सँ पकैर लेलक ... 
कि......
अचानक 
ठाकुरक घरक .केवार खुललै ,संगहि 
सिंह सन गर्जैत ठाकुर बहराएल घर 
सँ.... 
के छी उम्हर.....

गंगीयाक हाथक बाल्टी.... डोरी सहित छुटि के खैसि परलै ईनार में.... 
छपाक...

उल्टहि पएर अन्हारे अन्हार भागल जा रहल गंगीया....... 
कतेको काँट कूश गरलै... सोनित सँ समुच्चा पएर भीजि गेलै ओकरमुदा  भागैत रहल.... भागैत रहल.... घर में धुसिते भीतर सँ फटकी बन्द  लेलक .... 
सौझाँ में... देखलकै...

बिमार जोखना  गन्हाईत पैनि गट गट पीने जा रहल छल....

अनुवाद.. संतोषी.