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देवलख सँ द्वालख धैरि

देवलख सँ द्वालख धैरि...... किछु अंश...... कोसी... !! आय सँ करीब 160बरिष पहिने, कोसी नदी पूर्णिया के पुरब में बहैत छलय... आ आय , एकर निचला भाग दरिभंगा मधुबनी जिला में बहैत अई...... !! आजादी के बाद कोसी के नियंत्रित करबाक मंसूबा सँ सन् 1955 में एकर पूर्वी किनार पर विरपूर सँ कोपड़िया तक 125कि. मी. लम्बा, आ पश्चिमी किनार पर नेपालक भारदह सँ सहरसा में घोंघेपूर तक 126कि. मी. लम्बा तटबंध बनेबाक काज सुरू कएल गेल. ! आ लगभग 1963-64में एहि तटबंध के काज पूरा सेहो कए लेल गेल.... संगहि 1963 में बिरपूर बैरेज के निर्माण सेहो कएल गेल.... स्वच्छंद विचरण करै बाली ऐहि कोसी के दूटा तटबंध रूपी दिवाल के बीच बहबाक लेल पूर जोर तैयारी त भेलै... मुदा, ऐहि तटबंध के बीच पाँच टा जिला के लगभग 19टा प्रखंड के 400गाँव में बसोबास केनिहार जनमानस के संबंध में किछु खास नै सोचल गेल.... बल्कि, जबरन ऐहि जनमानसक गरदैन में फूँफकार कटैत कोसी नामक ऐहि साँप के बैन्ह देल गेल..... आब,, तटबंध के निर्माण क के मुक्त रूप सँ बहै बाली ऐहि कोसी के रोकि त देल गेलै... कोसी के पैन में आबै बला गैद (सिल्ट बालू पत्थर काद कोदो जीव जन्तु) के सेहो रूकावट भेनाई सहजहिं छै.. चुकि तटबंध नदी के फैलाव रोकै के संग संग एहि गाईद सबहक फैलाव सेहो त रोकि दैत छै... आ नदि के प्राकृतिक भुमि निर्माण में ,नदि निर्माण में बाधा त अबितैह टा छै... तटबंध के बीच गाईद जम्मा हुअय लगैत छै जै सँ धिरे धिरे नदी के तल उपर उठय लगैत छै.. बाढ़ि के लेवल उपर उठय लगै छै... तहन्.... तटबंध के सेहो उपर उठेनाई आ सुरक्षित केनाई मजबूरी बैनिये जाईत छै... मुदा कतेक... एकरहु त एकटा व्यवहारिक सीमा छै, चुकि तटबंध के जतेक उँच आ मजबूत कएल जेतै...सुरक्षित छेत्र पर बाढ़ि आ पैनिक जमाव के ओतेक बेसी खतरा बनैत जेतै.... कहावत छै... बहता पानी को कौन रोक सकता है..... फलस्वरूप.. दूनू तटबंध के बीच बहैत कोसी.. तटबंध सँ बाहर रहै बला सब लेल बेसी भयावह साबित भ रहल... कतेको बेर , एहि तटबंध के तोरि क कोसी बहराएल अई... जाहि में अनुमानहु सँ बेसी छैति भेलैय... कतेको लोक के अपन घर दुआरि ,खेती बारी ,आ रोजगारक साधन समाप्त भेलै... कतेको लोक हताहत भेल.... उदाहरण में.. उदाहरण में... 1963.. डलवा गाँव... बनरझूल्ला. 1967.. कुनौली.... 1968.. जमालपुर जल समाधि.. 1969.. घोंघेपूर... 1971.. भटनियाँ.. 1980.. बहुअरवा... 1984.. नवहट्टा... 1991.. जोगिनियाँ.. 2006नेपाल... कहबाक ई... क्रम चलैत रहतै.... रुकतै नै... द्वालख.. 1939-1951.. प्रबल वेग मेें बहय बाली ,अपन धारा परिवर्तन करबा में माहिर कोसी नदी,लगभग बारह साल धैरि ऐहि छेत्र में उत्पात मचाबैत रहल... ! साल में नौ महिना अपन तीव्र वहाव सँ बहैत कोसी, ऐहि ठामक जनजीवन अस्त व्यस्त करबा में कोनहु टा कसैर नै छोरलक... अन्न उपजा के कोनो नाम निशान नै रैहि गेलै, भुखमरी के नौबत आबि गेल रहै... फलस्वरूप गाम गाम सँ खास क के पुरूष वर्गक पलायन सुरू भ गेलै.. लोक सब मोरंग, कलकत्ता में जा क मजदुरी करय लागल.. ओहि मजदुरी के पैसा स बकौर -बराही दिस स खाद्यानक किन बेसाह करय लागल... गाम घर में मात्र महिला रैह गेली. ... कोसी के प्रलयंकारी वेग, कतेको जनमानस, माल मवेशी के अपन ग्रास बना लेलक.. तै पर सँ, दूषित भेल पैन, दुर्गंधित वातावरण.. ओह.. कतेको बेर हैजा, महामारी सहजहिं कतेको गाम के घेर लैत छलै ... हैजा बीमारी सँ घरक घर आ वंशक वंश उजैर उपैट गेलै .. दु टा मुर्दा जाबत जरा के गाम आबय ताबत चारि टा मुर्दा और परल भेटै... ओह कतेक भयावह दृश्य हेतै ओ.... सुनैत में जेना देह सिहैर उठै अई... चिकित्सा के कोनो व्यवस्था नै.. सुपौल स्वास्थ्य केंद्र पर जाईत जाईत... दस टा रोगी में दू टा कोनो भागमन्त बैच जाईत छलैक.... मधेपुर में ब्रम्हाचरण घोष नामक बंगाली डॉ. छलाह मुदा समुचित व्यवस्था नै के बराबर... समाचार प्रसारण के लेल दौराहा व्यवस्था रहै... सब गाम में एकटा मुस्डंड सनक लोक, जेकरा हाथ में एकटा भाला आ काँख में एकटा झोरी रहैत रहै... एक गामक दौराहा दौर के दोसर गामक दौराहा के समाचार कहलक आ ओ दौराहा दौर के तेसर गामक दौराहा के समाचार कहलक. .. ..ऐहि तरहें लोक एक दोसर गामक समाचार बुझय.... द्वालख में पहला स तिसरा क्लासक एकटा स्कूल रहै जाहि में गोरखा गामक भोला झा शिक्छक छलाह. .कोसी बाढि के कारण ओहो स्कूल कहियो ककरो दरबज्जा पर आ कहियो लछ्मी नारायण मंदिर पर चलावल जाईत रहय... एहेन विकट परिस्थिति रैहितो लोक में आपसी मेल जोल खुब रहै... वर्तमान में ..... सब तरहें सुख सुबिधा रैहितो लोकक आपसी मेल जोल में कमी सहजहि देखना जाईछ. .. ..कारण जे भी होऊ...संतोषी.


सत+संग=सत के संग... आदि काल सँ मानव मात्र में भगवानक प्रति अनन्त प्रेम श्रद्धा आ भक्ति निरंतर आबि रहल ... लोक अनेकानेक माध्यम सँ भगवत भजन करैत आबि रहल.. ताहि क्रम में, "कीर्तन " सेहो भजन भावक सुन्दर माध्यम बनल अई... गामें गाम , सब समुदाय में कीर्तन भजन के विशेष दर्जा सेहो भेटल अई... जत्र तत्र भजन कीर्तन ,स्टजाम, नवाह सँ वातावरण भक्तिमय भेल रहैत अई... संगहि कीर्तन भजन के माध्यम स सबगोटे एकठाम एकजुट भ बैसैत छैथि जाहि सँ आपसी प्रेम सेहो बनल रहैछ... धन्यवाद के पात्र छैथि ओ महामानव सब जे अपन पुर्वजक ऐहि कृति के एतेक व्यस्त जीवन में वरकरार राखने छैथि... आ समय समय पर जनमानस के भक्ति रस सँ ओत प्रोत भजन कीर्तन सुनबाक लेल भेटैत अई.... *********************---------*********************** आब,, बदलैत परिवेश में, कीर्तन आ कीर्तन मंडली में सेहो बड्ड बेसी बदलाव देखा पैरि रहल.... भगवानक भजन कीर्तन मात्र करबाक उद्देश्य रैहितो कीर्तन मंडली में अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, सचिव आदि पद आ पदभारी लेल उकटा पैंची होईत रहैत अई.... परोक्ष आ अपरोक्ष रूप सँ एहु ठाम लोभ, मद ,मोहक बाँसुरी बाजय लागल अई... एकटा कहाबत रहै...... राम नाम टेरहो भला.... मुदा आब,, आब त एक सँ बैढ़ि के एक नवतुरका गबैया सब जुरल छैथि कीर्तन मंडली में.... जे स्वयं के कोनों संगीत सम्राट सँ कम नै बुझै छैथि.... भले हि, एहि कीर्तन आ कीर्तन मंडली के प्रसादे ओ काग सँ कोईली बनल होईथ.... मुदा आब ओ ककरहु मोजर किया करताह... अपना रंग ढ़ंग में कीर्तन आ कीर्तन मंडली के रैंगि के अपन सहंसाही देखा रहल छैथि.... चुकी ,, संगीत सम्राट जे बैनि गेल छैथि... संगहि,, किछु गोटे त राजनीतिक खेल बेल सँ ल के अपन आनक भेदभाव तक कीर्तन भजन में उजागर करैत रहैत छैथि... रफ्ता रफ्ता माता के दर पे, ईवादत के लिए हम हैं आये... ईल्तजा है ऐ मइया हमारी, दुआ अपनी कबूल हो जाये.... एहेन तरहक माता के भजन सुनि क किछु गोटे वाह वाह करैत झुमि उठैत छैथि..... भले हि शब्द कपारक उपर बाटे निकाल गेल होईन... चलू से त नीक बात..... मदा ओत्तहि जौं दोसर कियो माताक भजन गबै छैथि... आसिन महिना में आएल नवराता. जाई छें तू गाम त जो हे रै मीता. जाईहन त हम्मर ई काम कैरि दिहन... माता के हम्मर सलाम कैहि दिहन.... त, ओएह महानुभाव सब टीका टिप्पणी करैत कहैत छथिन जे ई सलाम शब्द मुसलमान के छियैह... माता भजन में सलामक जगह प्रमाण कहियौ..... हहहहहह.... हाय रे मानसिकता.... हाय रे विचार..... हँ बात होईत छल नवका संगीत सम्राट सबहक.... अन्हरा गाम में कनहा राजा... ईनारक बेंग...... चुकि संगीतक "सा " भले नै जनैत छैथि.... हारमोनियम पर तीन टा आँगूर स बेसी नहिं छुआईत छैन्ह.... मुदा संगीत सम्राट.... किछु अपनहिं मोने.... किछु लोकक गलती सँ...... तथापि, जौं सहृदय जुरल बनल रहैथि त हर्जे कोन.... मुदा नै.... एहेन तरहक संगीत सम्राट, कीर्तन आ कीर्तन मंडली के अपन आधिपत्य बुईझ लैत छैथि... आ ताहि में निश्चित रूप सँ मंडली के वरिष्ठ गण के कमजोर पहलू एकर कारण होईत अई..... ई संगीत सम्राट सब जखन हारमोनियम पकरैत अई त लागत जेना सुर संगीत के देवी माता सरस्वती स्वयं समा गेल छथिन एकर पापी आत्मा में.... सोझाँ में बैसल औरो साजिन्दा सब के समधल रहय परैत छैह कखन ओकर मुँह फुजतै आ हम सब धरब.... चुकी, धरै पकरै में जौं कनिको उपर नीचा भेलैह त...... रूसि फुईल के कुप्पा भ जेथिन ई संगीत सम्राट सब...... हिनका सोझाँ में, मंडली के वरिष्ठ गण सब त सेना मुड़ी गारने रहै छैथि जेना द्रौपदी बस्त्र हरण नाटक चैलि रहल होऊ आ ई सब गोटे भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य के अभिनय क रहला हन...... सर्वाधिकार जे द देने छथिन...... कनी बेस बरहा दिहीन बौआ... कीर्तन के बीच्चहि में लाउडस्पीकर बला के चीकैरि के कहबा में कोनों पाबंदी नै....... चुकि, अनुशासन त पहिने बिका चुकल बीच हाट पर.... खास गामक घरक कीर्तन भजन में एक गोटे आगू आगू आ तकरा पाछू पाछू सबगोटे सामुहिक गान (कोरस) करैत छैथि,, मुदा ऐहि संगीत सम्राट संग जौं कीर्तन में बैसल छी त पाछुओ सँ गेबा में परहेज करय परत.... कारण जौं पाछु सँ गेबा काल कतौह सुर ताल उपर नीचा भ गेल त हिनक प्रकोपक शिकार सेहो होमय परत.... से धिया पुता होउथ आ कि मंडली के वरिष्ठ गण... ई संगीत सम्राट जत्र तत्र ककरहु भी कनपट्टा में धेल्लहि चटकन मारबाक अधिकार सेहो प्राप्त करने छैथि... जे भी होऊ..... धन्यवाद के पात्र छैथि एहेन कीर्तन मंडली आ मंडली के वरिष्ठ गण सब जे ऐहनो तरहक संगीत सम्राट सब के समुचित स्थान देने छैथि अपन मंडली में....... संगहि,, धन्यवाद के पात्र छैथि ओ महानुभाव सब जे गाईर माईर सुनलाक बादो... बेर बेर अपमानित भेलाक बादो फुसियों के भजन भाव में लागल छैथि...... कीर्तन मंडली के वरिष्ठ गण सब के ऐहेन लोक सब पर विशेष अंकुश राखक चाही.... अन्यथा ओ दिन दूर नैs जहन कीर्तन भजन में थपरी के जगह पर थापर बाजबाक प्रचलन बैनि जाय........ संतोषी